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कविता

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  पद्मावलि बाल कविताएँ   Padm Singh पद्म सिंह 11 वर्ष पहले     हाथी राजा बहुत बड़े, सूंड उठा कर कहाँ चले मेरे घर तो आओ ना, हलवा पूरी खाओ न आओ बैठो कुर्सी पर, कुर्सी बोली चर चर चर   कुँए में थोड़ा पानी, मम्मी मेरी रानी पापा मेरे राजा दूध पिलाएँ ताज़ा सोने की खिड़की चांदी का दरवाजा उसमे से कौन झांके मेरा भैया राजा गधा जानवर बड़े काम का जीवन जीता है गुलाम का धोबी के डंडे से डरता सब से ज्यादा मेहनत करता फिर भी कहते लोग, गधा है सीधे पन की यही सजा है   ऊंट मरुस्थल का राजा है    कड़ी धूप में भी ताज़ा है पानी पी ले एक दो घूँट मीलों सरपट दौड़े ऊँट   कितनी सुन्दर कितनी प्यारी   सब पशुओं में न्यारी गाय सारा दूध हमें डे देती आओ इसे पिला दें चाय   राम नगर से राजा आया  श्याम नगर से रानी रानी रोटी सेंक रही है राजा भरता पानी बिल्ली बोली म्याऊं मै आऊँ मै आऊँ  चूहा बोला ठहर जा  मै पहले छुप जाऊँ   बने डाक्टर छोटे भैया  फीस मांगते एक रुपैया जब इलाज को पहुंची गुड़िया उसे थमा दी मीठी पुड़िया   चंदा मामा खेले ड्रामा तो जोकर का काम...