शिव मन्दिर (पशुपतिनाथ जी) नेपाल

 जय श्री पशुपतिनाथ जी महाराज की जय...

नपाल अध्यात्म की भूमि है और एक समय में यह जगह पूरी तरह से जिंदगी के आध्यात्मिक पहलुओं से जुड़ी हुई थी।

पशुपतिनाथ मंदिर,तांत्रिक विद्या का सबसे प्रमुख मंदिर माना जाता है...

पशु मतलब 'जीवन'और 'पति'मतलब स्वामी या मालिक, यानी 'जीवन का मालिक' या 'जीवन का देवता'। पशुपतिनाथ दरअसल चार चेहरों वाला लिंग हैं। पूर्व दिशा की ओर वाले मुख को तत्पुरुष और पश्चिम की ओर वाले मुख को सद्ज्योत कहते हैं। उत्तर दिशा की ओर देख रहा मुख वामवेद है, तो दक्षिण दिशा वाले मुख को अघोरा कहते हैं।

ये चारों चेहरे तंत्र-विद्या और वेदों के चार बुनियादी सिद्धांत हैं।माना जाता है कि यह ज्योतिर्लिंग, वेद लिखे जाने से पहले ही स्थापित हो गया था। 

पौराणिक कहानियों के अनुसार,कुरुक्षेत्र की लड़ाई के बाद अपने ही बंधुओं की हत्या करने की वजह से,पांडव बेहद दुखी थे। उन्होंने अपने भाइयों और सगे संबंधियों को मारा था। इसे गोत्र वध कहते हैं। उनको अपनी करनी का पछतावा था और वे खुद को अपराधी महसूस कर रहे थे। खुद को इस दोष से मुक्त कराने के लिए वे शिव की खोज में निकल पड़े।लेकिन शिव नहीं चाहते थे कि जो जघन्य अपराध उन्होंने किया है, उससे उनको इतनी आसानी से मुक्ति दे दी जाए। इसलिए पांडवों को अपने पास देखकर उन्होंने एक बैल का रूप धारण कर लिया और वहां से भागने की कोशिश करने लगे...लेकिन पांडवों को उनके भेद का पता चल गया और वे उनका पीछा करके उनको पकड़ने की कोशिश में लग गए। इस भागा दौड़ी के दौरान शिव जमीन में लुप्त हो गए और जब वह पुन: अवतरित हुए, तो उनके शरीर के टुकड़े अलग-अलग जगहों पर बिखर गए।

नेपाल के पशुपतिनाथ में उनका मस्तक गिरा था और तभी इस मंदिर को तमाम मंदिरों में सबसे खास माना जाता है। 

केदारनाथ में बैल का कूबड़ गिरा था। 

बैल के आगे की दो टांगें तुंगनाथ में गिरीं। यह जगह केदार के रास्ते में पड़ता है। 

बैल का नाभि वाला हिस्सा हिमालय के भारतीय इलाके में गिरा,जिसे मध्य-महेश्वर कहा जाता है। यह एक बहुत ही शक्तिशाली मणिपूरक लिंग है।

बैल के सींग जहां गिरे, उस जगह को कल्पनाथ कहते हैं। 


जरूर जाएं,मन और दृष्टि को बहुत विस्तार मिलेगा


जय भोलेनाथ💐🙏

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